मामला 4 संतान, फर्जी सेवा पुस्तिका, दो समग्र ID, फर्जी गोदनामा और SC/ST छात्रों की फीस गबन से जुड़ा
SDM चितरंगी से अंतरित शिकायत पर BEO चितरंगी का पत्र क्रमांक 387 दिनांक 22/10/2026 विवादों में, शिकायतकर्ता ने कलेक्टर सिंगरौली से BEO के निलंबन और लोकायुक्त जांच की मांग की, कहा – मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी ब्लॉक से जनसुनवाई और पारदर्शिता कानून को ठेंगा दिखाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ शिक्षा विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी ने भ्रष्टाचार की शिकायत को दबाने के लिए नया फार्मूला निकाला है – जनसुनवाई में की गई शिकायत को सूचना का अधिकार (RTI) बताकर मना कर दो।
मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्दी के शिक्षक श्री चन्द्रप्रताप त्रिपाठी से जुड़ा है। उन पर 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान, कुल 4 संतानें होते हुए सेवा पुस्तिका में 2 ही दर्शाने, दो-दो समग्र ID बनवाने, फर्जी गोदनामा और SC/ST छात्रों की फीस हड़पने का गंभीर आरोप है।
प्वाइंट टू प्वाइंट पूरा मामला –
प्वाइंट 1 – शिकायत कब और किसने की?
ग्राम बड़कुड, तहसील चितरंगी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विवेक कुमार द्विवेदी ने दिनांक 29/09/2026 को उपखण्ड अधिकारी चितरंगी के समक्ष जनसुनवाई में लिखित शिकायत दी। शिकायत की प्राप्ति जनपद शिक्षा केन्द्र चितरंगी की मोहर से हुई। शिकायत में शिक्षक चन्द्रप्रताप त्रिपाठी पर 5 बड़े आरोप लगाए गए।
प्वाइंट 2 – पहला आरोप – 4 संतान, सेवा नियम का उल्लंघन।
मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य शर्तें) नियम और पंचायत कर्मी नियम के अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान पैदा होने पर सरकारी सेवा के लिए अपात्र माना जाता है। आरोप है कि शिक्षक को 2001 के बाद दो संतानें और हुईं और कुल 4 जीवित संतानें हैं। फिर भी नौकरी में बने हुए हैं। नियमानुसार सेवा समाप्त होनी चाहिए।
प्वाइंट 3 – दूसरा आरोप – सेवा पुस्तिका में कूटरचना।
आरोप है कि सेवा पुस्तिका में मात्र 2 संतानों का नाम दर्ज है और स्वयं प्रमाणित कर दिया गया है। यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) 336, 338, 340 – दस्तावेज में कूटरचना के दायरे में आता है।
प्वाइंट 4 – तीसरा आरोप – दो समग्र ID का खेल।
आरोप है कि दो समग्र ID बनवाई गई हैं। एक ID में 2 बच्चों का नाम, दूसरी ID जो छोटे भाई राजेन्द्र तिवारी की है, उसमें बाकी बच्चों का नाम दर्ज कराया गया है। समग्र ID सरकारी दस्तावेज है, इसमें हेरफेर गंभीर अपराध है।
प्वाइंट 5 – चौथा आरोप – फर्जी गोदनामा।
दो पुत्रियों को छोटे भाई राजेन्द्र तिवारी को दत्तक पुत्री के रूप में गोद दे दिया गया। आरोप है कि छोटे भाई को इस गोदनामे की जानकारी ही नहीं। हिन्दू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम 1956 के तहत बिना न्यायालय और बिना स्वीकृति के गोदनामा शून्य है। फर्जी गोदनामा FSL जांच योग्य है।
प्वाइंट 6 – पांचवां आरोप – गबन।
विद्यालय स्तर पर मिलने वाली अनुदान राशि, संबल योजना की राशि और SC/ST छात्रों की वापस हुई शुल्क राशि को छात्रों के बैंक खाते में न भेजकर स्वयं हड़पने का आरोप। यह BNS 316(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 7, 13 के तहत आता है।
प्वाइंट 7 – शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई?
SDM चितरंगी ने शिकायत को जांच के लिए BEO कार्यालय चितरंगी को अंतरित कर दिया। नियमानुसार BEO को सेवा पुस्तिका, समग्र ID, गोदनामा, बैंक स्टेटमेंट जब्त कर SDM को रिपोर्ट भेजनी थी।
प्वाइंट 8 – BEO ने क्या किया? यहीं से भ्रष्टाचार शुरू।
BEO चितरंगी ने जांच करने के बजाय पत्र क्रमांक 387 दिनांक 22/10/2026 जारी किया। इसमें लिखा – “आपके द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत चाही गई व्यक्तिगत जानकारी… धारा 8(1)(j) और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 की धारा 44(3) के तहत नहीं दी जा सकती। यदि किसी भाग में व्यक्तिगत नहीं है तो धारा 10 के तहत दी जाएगी।”
प्वाइंट 9 – सबसे बड़ा सवाल – जनसुनवाई RTI कैसे बन गई?
शिकायतकर्ता का कहना है – “मैंने सूचना का अधिकार में आवेदन ही नहीं दिया। मैंने जनसुनवाई में कार्रवाई मांगी। BEO ने मेरी शिकायत को ही RTI मान लिया। यह न्याय का गला घोंटना है।” जनसुनवाई मुख्यमंत्री जनसुनवाई योजना 2014 और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आती है, जबकि RTI 2005 अलग कानून है।
प्वाइंट 10 – कानून क्या कहता है? RTI धारा 8(1)(j) क्या है?
धारा 8(1)(j) कहती है – ऐसी सूचना जो व्यक्तिगत है और जिसका सार्वजनिक कार्य से कोई लेना-देना नहीं, उसे नहीं दिया जाएगा। परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने गिरीश रामचंद्र देशपांडे बनाम CIC 2014 और केरल हाईकोर्ट के 2024-25 के आदेशों में साफ कहा है – लोक सेवक की सेवा, वेतन, नियुक्ति, संतान विवरण, उपस्थिति, बिल-वाउचर व्यक्तिगत नहीं, सार्वजनिक है। खासकर जब मामला भ्रष्टाचार का हो तो परंतुक कहता है – जनहित में व्यक्तिगत जानकारी भी देनी होगी।
प्वाइंट 11 – DPDP Act 2023 की धारा 44(3) क्या है?
सरकार ने RTI की धारा 8(1)(j) में शब्द जोड़े हैं। परन्तु CIC ने 13 नवंबर 2025 के बाद भी कई आदेशों में कहा है – धारा 44(3) से RTI खत्म नहीं होती। जनहित परीक्षण अनिवार्य है। BEO ने जनहित परीक्षण किया ही नहीं।
प्वाइंट 12 – धारा 10 और 7(8) का उल्लंघन।
BEO ने खुद लिखा – “यदि व्यक्तिगत नहीं है तो धारा 10 के तहत देंगे” – पर दिया नहीं। कौन सा भाग व्यक्तिगत है, कौन सा नहीं, बताया ही नहीं। धारा 7(8) के तहत तर्कपूर्ण कारण देना अनिवार्य है, सिर्फ धारा लिखना पर्याप्त नहीं।
प्वाइंट 13 – मिलीभगत का आरोप।
आरोपी शिक्षक शास.उ.मा.वि. बर्दी में प्रभारी प्राचार्य है और BEO उसी ब्लॉक का अधिकारी है। इसलिए हितों का टकराव है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि BEO आरोपी को बचा रहा है।
प्वाइंट 14 – शिकायतकर्ता ने अब क्या किया?
विवेक द्विवेदी ने दो आवेदन तैयार किए हैं – पहला SDM चितरंगी, पिन 486882 को – BEO पत्र 387 निरस्त कर पुनः जांच की मांग। दूसरा जिला कलेक्टर सिंगरौली, श्री अंकित अस्थाना, पिन 486886 को – BEO को तत्काल निलंबित कर लोकायुक्त जांच की मांग।


प्वाइंट 15 – मांग क्या है?
- BEO का पत्र 387 निरस्त हो।
- BEO चितरंगी और जांच अधिकारी निलंबित हों।
- जांच जिले से बाहर DEO / संयुक्त संचालक रीवा संभाग की टीम से हो।
- सेवा पुस्तिका, समग्र ID, गोदनामा, बैंक खातों की FSL जांच हो।
- व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट 2014 के तहत सुरक्षा मिले।
प्वाइंट 16 – आगे क्या?
शिकायतकर्ता ने कहा – यदि 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो कलेक्टर कार्यालय के समक्ष अनशन और लोकायुक्त रीवा, EOW में FIR दर्ज कराई जाएगी। मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है, इसलिए अब लोकायुक्त ही अंतिम विकल्प है।

वर्ल्ड इनफॉरमेशन न्यूज़ से ब्यूरो चीफ आशीष सोनी की खास रिपोर्ट
