इंडियन बैंक पर सब्सिडी रोकने के आरोपजनसुनवाई में गूंजा सब्सिडी रोकने का मामला,मुख्यमंत्री के मंच से मिला ऋण, फिर भी नहीं मिला लाभ

जिला कलेक्ट्रेट में कल मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में इंडियन बैंक की देवसर शाखा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया। ग्राम झखरावल निवासी हितग्राही ने करीब 9 वर्षों के दस्तावेज और शिकायतों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि डेयरी इकाई के लिए स्वीकृत ऋण और सरकारी सब्सिडी के बावजूद उसे योजना का लाभ नहीं मिल सका।
शिकायतकर्ता विनोद द्विवेदी का कहना है कि वह पिछले तीन वर्षों से एलडीएम समेत बैंक और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। जनसुनवाई में मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने इसे टीएल में लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत 3 जनवरी 2017 को आवेदन किया था। पशुपालन विभाग के स्तर से पात्रता पाए जाने के बाद इंडियन बैंक देवसर ने 3,40,688 का ऋण स्वीकृति पत्र जारी किया। 12 जनवरी 2022 को अटल सामुदायिक भवन में आयोजित रोजगार मेले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में उसे ऋण स्वीकृति पत्र भी प्रदान किया गया था। इधर इंडियन बैंक ने सब्सिडी को तीन साल तक रोक रखा था और अब उसे सरकार को वापस कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि आखिरकार तीन साल सब्सिडी को रखने का औचित्य क्या था? शिकायत कर्ता ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग कलेक्टर से की है।


तीन साल बाद सब्सिडी किया वापस
बताया जाता है कि शिकायतकर्ता का आरोप है कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नोडल खाते से 1,13,562 की सरकारी सब्सिडी 10 मार्च 2022 को इंडियन बैंक देवसर को प्राप्त हो गई, लेकिन बैंक ने राशि को करीब तीन वर्ष तक अपने स्तर पर रोके रखा। शिकायतकर्ता के मुताबिक 23 जनवरी 2025 को सब्सिडी वापस किए जाने तक उसे ऋण का लाभ नहीं मिला। मामले में सबसे बड़ा सवाल बैंक के कथित विरोधाभासी जवाबों को लेकर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर 2019 में कई बार आवेदन अस्वीकृत बताया गया, जबकि बाद में 2021 में प्रोविजनल स्वीकृति और 2022 में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में सैंक्शन लेटर दिया गया। वहीं बाद में खराब सिविल का हवाला देकर ऋण देने में असमर्थता जताई गई।


अब न्यायालयीन शरण में जाने की तैयारी
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच उसकी 26 शिकायतों को वास्तविक समाधान के बिना डिमांड बेस्ड बताकर फोर्स क्लोज कर दिया गया। उसका कहना है कि चार वर्ष तक चली मुख्य शिकायत को भी बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह लगातार एलडीएम, बैंक अधिकारियों और संबंधित विभागों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन न्याय नहीं मिला। अब उसने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सरकारी राशि से जुड़े प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। बैंक प्रबंधन को विधिक नोटिस देने की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की बात शिकायतकर्ता ने कही है।

ब्यूरो चीफ :- आशीष सोनी

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