कक्षा बनी सियासी प्रचार का मंच! छात्राओं से ‘इंदौर चलने’ की अपील, कांग्रेस के गमछे में पहुंचा व्यक्ति

शासकीय विद्यालय में कथित राजनीतिक कार्यक्रम का प्रचार, छात्राओं से QR कोड स्कैन कर नाम-पता-मोबाइल सहित विवरण भरवाने का आरोप; बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश को लेकर उठे गंभीर सवाल

शासकीय विद्यालयों को बच्चों की शिक्षा, अनुशासन और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के लिए जाना जाता है, लेकिन सिंगरौली जिले के दूरस्थ अंचल से सामने आया एक मामला विद्यालय की कक्षा में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लंघाडोल की कक्षा में कथित तौर पर एक व्यक्ति के पहुंचने और छात्राओं के बीच राजनीतिक कार्यक्रम का प्रचार करने का वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है।
कथित वीडियो में कक्षा 9वीं-10वीं की छात्राओं के बीच मौजूद व्यक्ति कांग्रेस पार्टी के चुनाव चिह्न वाला तिरंगा गमछा पहने नजर आ रहा है। वह विद्यार्थियों को आगामी 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित राहुल गांधी के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों के पहुंचने की अपील करता दिखाई देता है। मामला सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ राजनीतिक प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी उठ रहा है कि आखिर किसी राजनीतिक गतिविधि से जुड़ा व्यक्ति शासकीय विद्यालय की कक्षा तक किसकी अनुमति से पहुंचा?

कक्षा में पढ़ाई या राजनीतिक कार्यक्रम का प्रचार?

विद्यालय परिसर और विशेष रूप से कक्षा को विद्यार्थियों के अध्ययन का स्थान माना जाता है। ऐसे में यदि किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा कक्षा के भीतर जाकर राजनीतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी के लिए अपील की गई है, तो इसकी अनुमति और परिस्थितियों की जांच जरूरी हो जाती है।
सामने आए विवरण के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने विद्यार्थियों के बीच इंदौर में होने वाले कार्यक्रम की जानकारी साझा की और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को वहां पहुंचने के लिए प्रेरित करने की बात कही।
मामले का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। शिकायतकर्ता की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित व्यक्ति विद्यालय परिसर में किस उद्देश्य से पहुंचा था और उसे कक्षा में विद्यार्थियों से बातचीत करने की अनुमति किसने दी।

QR कोड स्कैन कर भरवाया जा रहा था विवरण?

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ा है। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति छात्राओं से QR कोड स्कैन करवाकर नाम, उम्र, पता, मोबाइल नंबर और जिला जैसी जानकारी दर्ज करने के लिए कह रहा था।
यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह केवल राजनीतिक गतिविधि का मामला नहीं रह जाएगा, बल्कि नाबालिग विद्यार्थियों से व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया की भी जांच आवश्यक होगी।
विशेषकर जब बात स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं की हो, तब विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा विद्यार्थियों से किस प्रकार की जानकारी ली जा रही है, उसका उद्देश्य क्या है और वह जानकारी कहां इस्तेमाल की जानी है।

पेपर लीक और भविष्य का हवाला देकर कार्यक्रम में पहुंचने की अपील

कथित वीडियो में संबंधित व्यक्ति विद्यार्थियों के भविष्य और पेपर लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख करता हुआ भी दिखाई देने की बात सामने आई है। इन मुद्दों को आधार बनाकर विद्यार्थियों से इंदौर में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने की अपील किए जाने का आरोप है।
यही कारण है कि अब मामला राजनीतिक प्रचार से आगे बढ़कर विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ होने वाली गतिविधियों की निगरानी और अनुमति व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
विद्यालयों में विद्यार्थियों को विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और जागरूकता गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है, लेकिन यदि किसी गतिविधि का स्वरूप राजनीतिक प्रचार या राजनीतिक कार्यक्रम में भागीदारी के आह्वान जैसा हो, तो उसकी वैधता और अनुमति की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

किसकी अनुमति से पहुंचा व्यक्ति?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि संबंधित व्यक्ति विद्यालय की कक्षा में कैसे पहुंचा?
क्या विद्यालय प्रबंधन को उसके आने की जानकारी थी?
क्या उसे कक्षा में छात्राओं से बातचीत की अनुमति दी गई थी?
यदि अनुमति दी गई थी तो किस स्तर से?
और यदि अनुमति नहीं थी, तो बाहरी व्यक्ति कक्षा तक कैसे पहुंच गया?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। शिकायतकर्ता ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

शिक्षा विभाग ने मांगा प्राचार्य से प्रतिवेदन

मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए विद्यालय के प्राचार्य से प्रतिवेदन मांगा है। जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी के अनुसार, ऐसी जानकारी विभाग को मिली है और लंघाडोल विद्यालय के प्राचार्य से प्रतिवेदन मांगा गया है। प्रतिवेदन आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के इस रुख के बाद अब निगाहें विद्यालय से मिलने वाले प्रतिवेदन पर टिक गई हैं। प्रतिवेदन में घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति, संबंधित व्यक्ति के विद्यालय में आने का उद्देश्य, प्रवेश की अनुमति, विद्यार्थियों से बातचीत और व्यक्तिगत जानकारी लिए जाने से जुड़े तथ्यों का उल्लेख महत्वपूर्ण होगा।


जिला निर्वाचन अधिकारी से भी जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जिला शिक्षा अधिकारी के साथ-साथ जिला निर्वाचन अधिकारी से भी मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में कथित वीडियो की सत्यता, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और विद्यालय परिसर में हुई गतिविधि की परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है, उसे विद्यालय में प्रवेश की अनुमति किसने दी थी और QR कोड के माध्यम से विद्यार्थियों से जानकारी लेने का वास्तविक उद्देश्य क्या था।
इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नाबालिग विद्यार्थियों की जानकारी का मामला भी अहम

इस घटनाक्रम में सबसे संवेदनशील पहलू विद्यार्थियों की निजी जानकारी से जुड़ा बताया जा रहा है। नाम, उम्र, पता और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी नाबालिग विद्यार्थियों से किस उद्देश्य से ली जा रही थी, इसकी स्पष्टता आवश्यक है।
विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने यह सवाल भी रहेगा कि क्या विद्यार्थियों को ऐसी जानकारी साझा करने के लिए कहा गया था और यदि हां, तो किसकी अनुमति से?
मामले की जांच में यह भी देखा जाना जरूरी होगा कि संबंधित QR कोड किस संस्था अथवा व्यक्ति से जुड़ा था और उसके माध्यम से दर्ज की गई जानकारी का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाना था।
जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर
फिलहाल मामला शिकायत और कथित वीडियो के आधार पर जांच के दायरे में है। किसी व्यक्ति अथवा संस्था पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।
लेकिन इस घटनाक्रम ने शासकीय विद्यालयों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश, विद्यार्थियों से बातचीत, राजनीतिक गतिविधियों और व्यक्तिगत जानकारी एकत्र किए जाने को लेकर निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अब देखना यह होगा कि विद्यालय प्राचार्य द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में क्या तथ्य सामने आते हैं और शिक्षा विभाग उन तथ्यों के आधार पर क्या कार्रवाई करता है।

इनका कहना

“ऐसी जानकारी मिली है। लंघाडोल विद्यालय के प्राचार्य से प्रतिवेदन मांगा गया है। प्रतिवेदन आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
कविता त्रिपाठी, डीईओ, सिंगरौली

ब्यूरो चीफ :- आशीष सोनी

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