शिक्षा का मंदिर’ या मौत का कुआं?: सुलखान स्कूल में मासूमों की जान दांव पर, लाखों डकार कर शौचालय पर बरसों से जड़ा है ताला!


चितरंगी के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सरकारी सिस्टम की शर्मनाक लापरवाही; परिसर बना कचराघर और जहरीला जंगल, जिम्मेदार मौन।

क्या सिंगरौली जिले का शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या आदिवासी अंचल के मासूम बच्चों की जान की कीमत सरकारी अफसरों के लिए कुछ भी नहीं है?
यह तीखे सवाल खड़े कर रही है चितरंगी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुलखान की डरावनी ग्राउंड रिपोर्ट।
वर्तमान बरसात के सीजन में इस स्कूल की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि यहाँ आने वाले नौनिहाल हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
शासन द्वारा लाखों रुपए का बजट बहाए जाने के बावजूद धरातल पर सिर्फ भ्रष्टाचार की बदबू आ रही है।

लाखों की ‘सरकारी डकैती’, शो-पीस बने शौचालय पर बरसों से ताला-
एक तरफ सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं सुलखान स्कूल में इस अभियान के मुंह पर कालिख पोती जा रही है।
बच्चों और विशेषकर छात्राओं की सुविधा के लिए यहाँ लाखों रुपए की लागत से शासकीय शौचालय का निर्माण कराया गया था। परंतु, यह शौचालय सिर्फ और सिर्फ कागजों पर चालू है।
जमीनी हकीकत यह है कि विगत कई वर्षों से इस शौचालय के मुख्य दरवाजे पर रहस्यमयी ताला लटका हुआ है।
शौचालय का उपयोग न होना यह साफ गवाही देता है कि जनता के टैक्स का लाखों रुपया सीधे कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गया। शौचालय बंद होने के कारण सबसे ज्यादा फजीहत यहाँ पढ़ने वाली छात्राओं को झेलनी पड़ रही है, जो खुले में जाने को विवश हैं।

नरक बना प्रांगण, कचरे के ढेर और सड़ांध के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे-

स्कूल का मुख्य प्रांगण इन दिनों किसी डंपिंग यार्ड (कचराघर) जैसा नजर आ रहा है। परिसर में चारों तरफ कचरे का अंबार लगा हुआ है।
लगातार हो रही बारिश के कारण यह कचरा सड़ चुका है, जिससे उठने वाली भयानक दुर्गंध से पूरी स्कूल बेहाल है।
मच्छरों के भारी प्रकोप और इस गंदगी के कारण स्कूल में मलेरिया, डेंगू और अन्य संक्रामक महामारियों का खतरा चरम पर है। लेकिन मखमली दफ्तरों में बैठने वाले चितरंगी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को यह बदबू दिखाई और सुनाई नहीं दे रही है।
झाड़ियों में काल का पहरा, जहरीले जीवों का खौफहद तो तब हो जाती है जब स्कूल भवन के आस-पास नजर जाती है।
स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण पूरा परिसर ऊंची-ऊंची कटीली झाड़ियों और घने जंगल में तब्दील हो चुका है।
बारिश के इस मौसम में इन झाड़ियों के बीच जहरीले सांप, बिच्छू और अन्य खतरनाक जीव-जंतु रेंगते रहते हैं।
स्कूल का मैदान अब बच्चों के खेलने के लिए नहीं, बल्कि जहरीले जीवों का गढ़ बन चुका है।
मासूम बच्चों के पैर कब किसी सांप पर पड़ जाएं और कोई अनहोनी हो जाए, इसकी गारंटी लेने वाला कोई नहीं है।
स्कूल में आने वाला मेंटेनेंस ग्रांट का पैसा हर साल किसकी जेब में जा रहा है, यह भी बड़ा जांच का विषय है।

ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, उग्र आंदोलन की चेतावनी-

सुलखान के स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का गुस्सा अब फूट पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की इस दुर्दशा और बंद शौचालय को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई, लेकिन बीआरसी और डीईओ (DEO) कार्यालय ने आज तक सुध नहीं ली।
ग्रामीणों ने अब कलेक्टर सिंगरौली से इस महा-लापरवाही पर सीधे दखल की मांग की है।
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तत्काल स्कूल परिसर की साफ-सफाई नहीं कराई गई, बंद शौचालय का ताला नहीं खोला गया और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होंगे।

खरे सवाल?
शौचालय पर सालों से ताला क्यों है? क्या इसका निर्माण सिर्फ ठेकेदार का बिल पास कराने और कमीशन बांटने के लिए हुआ था?
परिसर की सफाई के लिए हर साल आने वाली शासकीय राशि (कंपोजिट ग्रांट) का उपयोग कहाँ किया गया?
अगर झाड़ियों से निकलकर किसी जहरीले जीव ने किसी बच्चे को नुकसान पहुँचाया, तो क्या बीआरसी चितरंगी या स्कूल हेडमास्टर इसकी जिम्मेदारी लेंगे?

ब्यूरो चीफ :- आशीष सोनी

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