आयुक्त लोक शिक्षण एवं अपने ही आदेश को जिला शिक्षा अधिकारी ने दिखाया ठेंगा, ई-अटेंडेंस से बचने के लिए निकाला नया तोड़, मुख्यालय में जारी है दलाली का खेल मध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा शासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों के संलग्नीकरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके विपरीत सिंगरौली जिले में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा खुद अपने हस्ताक्षरित आदेशों की धज्जियां उड़ाने और चहेते शिक्षकों को उपकृत करने का गंभीर मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली द्वारा 8 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक 1878/स्थापना/2026 में आयुक्त लोक शिक्षण के निर्देशों का हवाला देते हुए समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर सभी अटैच शिक्षकों को मूल शाला भेजने और संलग्नीकरण शून्य होने का प्रमाण-पत्र देने का आदेश दिया गया था। इस आदेश के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय जिला मुख्यालय, डीईओ कार्यालय, बीईओ कार्यालय और सुविधाभोगी शहरी स्कूलों में डटे हुए हैं।
कागजों में प्रमाण-पत्र, मैदान में अटैचमेंट:
विश्वस्त सूत्रों के माध्यम से सामने आई जानकारी के अनुसार दर्जनों शिक्षक व लोकसेवक अपनी मूल पदस्थापना से दूर अन्य स्थानों पर मलाईदार व्यवस्था बनाए हुए हैं । शासकीय कन्या उमावि बैढ़न सबसे सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है जहाँ डीईओ द्वारा प्राचार्य का प्रभार तो बदल दिया गया परन्तु अभी भी शासकीय माध्यमिक शाला पिपराखुर्द से माध्यमिक शिक्षक बाबूलाल राम कुशवाह, प्राथमिक शाला ननियाडाल से दीपसिंहिया नागरी, प्रा.शा. केवटा टोला से अम्बिका शाह, मा.शा. उत्तर टोला (बरहसना) से अभिषेक गौतम तथा कन्या उमावि देवसर से उच्च माध्यमिक शिक्षक श्रीमती जागृति सिंह अपनी मूल शाला छोड़कर कन्या उमावि बैढ़न में संलग्न हैं।
प्रशासनिक दफ्तरों में बाबूगीरी कर रहे शिक्षक:-प्रा.शा. महुहवा टोला भाऊखाड़ की प्राथमिक शिक्षिका चन्द्रावती ठाकुर डीईओ कार्यालय में संलग्न हैं। वहीं मा.शा. अमलोरी की प्राथमिक शिक्षिका श्रीमती कोमल बीईओ कार्यालय बैढ़न में अटैच हैं। मा.शा. बलियरी के माध्यमिक शिक्षक रजनीश तिवारी शासकीय उत्कृष्ट उमावि बैढ़न में तथा प्रा.शा. गड़हरा के प्राथमिक शिक्षक प्रशान्त सिंह शा. उमावि गड़हरा में कार्यरत हैं।
‘कर्तव्य प्रमाण पत्र’ का खेल: बिना स्कूल जाए निकल रहा वेतन-
संलग्नीकरण के इस तंत्र में नियमों को बाईपास करने का एक नया और चौंकाने वाला पैंतरा भी सामने आया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बगैया में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक प्रणवेश कुमार द्विवेदी का विद्यालय जिला मुख्यालय से काफी दूरी पर स्थित है। स्कूल दूर होने के कारण शिक्षक द्वारा मूल संस्था में न तो नियमित अध्यापन कराया जाता है और न ही ऑनलाइन ई-अटेंडेंस लगाई जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षक की मुख्यालय में उपस्थिति प्रमाणित करते हुए ‘कर्तव्य प्रमाण पत्र’ जारी कर दिया जाता है। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षक का मासिक वेतन बिना किसी रोक-टोक के आहरित हो रहा है, जबकि यह शिक्षक पूरे दिन मुख्यालय और डीईओ कार्यालय में मौजूद रहकर गैर-शिक्षकीय गतिविधियों में लगा रहता है।
मुख्यालय में मौजूदगी और कथित वसूली के आरोप
दस्तावेजों और विभागीय कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक, संलग्नीकरण का यह खेल केवल शैक्षणिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कथित प्रशासनिक सांठगांठ सक्रिय है।प्राथमिक शिक्षक प्रदीप कुमार तिवारी (मूल पदस्थापना प्रा.शा. गनियारी) और प्राथमिक शिक्षक रोहणी तिवारी (उमावि तियरा) पर आरोप है कि ये शिक्षक अपनी मूल शाला में अध्यापन कराने के बजाय ई-अटेंडेंस लगाने के बाद पूरे दिन डीईओ, डीपीसी व बीईओ दफ्तरों में जमे रहते हैं और विभागीय कार्यों की दलाली में संलग्न रहते हैं। कार्यालय के सहायक ग्रेड-1 पर विद्यालयों के ऑडिट के नाम पर प्राचार्यों पर अनुचित दबाव बनाने तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों से पेंशन प्रकरणों के निराकरण के एवज में नाजायज लाभ प्राप्त कर अधिकारियों तक पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग-
एक तरफ चितरंगी, देवसर और माड़ा अंचल के कई स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, यहाँ का छात्र शिक्षक अनुपात प्रदेश में सबसे अधिक चिंताजनक है ,वहीं दूसरी तरफ मुख्यालय में शिक्षकों को संलग्नीकरण और ‘कर्तव्य प्रमाण पत्र’ की आड़ में संरक्षण दिया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने संभागीय आयुक्त, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण रीवा संभाग एवं कलेक्टर सिंगरौली से मांग की है कि डीईओ कार्यालय द्वारा जारी कागजी प्रमाण-पत्रों और बगैर ई-अटेंडेंस के ‘कर्तव्य प्रमाण पत्र’ पर निकाले जा रहे वेतनों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों व संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

वर्ल्ड इनफॉरमेशन न्यूज़ से संवाददाता विवेक कुमार द्विवेदी की खास रिपोर्ट
