सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल को बड़ी जिम्मेदारी, राज्य स्तरीय चयन समिति के अध्यक्ष नियुक्त

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल को राज्य शासन ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. किशोर न्याय व्यवस्था से संबंधित राज्य स्तरीय चयन समिति के रिक्त अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति की गई है. मध्य प्रदेश राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार यह नियुक्ति किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 और संबंधित किशोर न्याय नियमों के तहत की गई है. इसी के साथ राज्य शासन ने समिति के रिक्त सदस्य पद पर मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डाॅ. निवेदिता शर्मा को नियुक्त किया है.

राज्य स्तरीय चयन समिति की भूमिका किशोर न्याय व्यवस्था से जुड़े संस्थानों के गठन और आवश्यक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है. शासन के इस निर्णय के बाद प्रदेश के नए जिलों में किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियों के गठन की प्रक्रिया को भी संस्थागत आधार मिलेगा.

न्यायमूर्ति पालीवाल को मिली अहम जिम्मेदारी
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल का न्यायिक अनुभव अब किशोर न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक दायित्व में उपयोग किया जाएगा. उन्हें राज्य स्तरीय चयन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. समिति के माध्यम से किशोर न्याय व्यवस्था के तहत आवश्यक चयन और गठन संबंधी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा.

किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों के मामलों की सुनवाई और देखरेख के लिए किशोर न्याय बोर्ड तथा देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बाल कल्याण समितियों की व्यवस्था है. ऐसे में इन संस्थाओं का प्रभावी गठन और संचालन बाल संरक्षण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

निवेदिता शर्मा समिति की सदस्य नियुक्त
राज्य शासन ने राज्य स्तरीय चयन समिति के रिक्त सदस्य पद पर मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डाॅ. निवेदिता शर्मा की नियुक्ति भी की है. इस नियुक्ति के साथ समिति की संरचना को पूरा करने की दिशा में कदम उठाया गया है.

राज्य में किशोर न्याय और बाल संरक्षण से जुड़े संस्थानों के गठन में समिति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. समिति के अध्यक्ष और सदस्य के रूप में नई नियुक्तियों के बाद संबंधित जिलों में आवश्यक संस्थागत व्यवस्था को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.

चार नए जिलों में किशोर न्याय बोर्ड का गठन
राज्य शासन ने अधिसूचना के माध्यम से निवाड़ी, मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा जिलों के लिए किशोर न्याय बोर्डों का गठन किया है. नए जिलों में अलग से किशोर न्याय बोर्ड गठित होने से वहां कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों से संबंधित मामलों के निराकरण के लिए स्थानीय स्तर पर संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध होगी.

किशोर न्याय बोर्ड अधिनियम के तहत निर्धारित शक्तियों और दायित्वों का निर्वहन करेंगे. बच्चों से जुड़े मामलों में सामान्य आपराधिक न्याय व्यवस्था से अलग किशोर न्याय कानून के प्रावधान लागू होते हैं. ऐसे में नए जिलों में बोर्ड का गठन इस व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

बाल कल्याण समितियां भी गठित
चारों जिलों में किशोर न्याय बोर्ड के साथ बाल कल्याण समितियों का गठन भी किया गया है. ये समितियां ऐसे बच्चों से जुड़े मामलों में दायित्व निभाएंगी, जिन्हें देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है.

बाल कल्याण समितियों के सामने ऐसे मामलों की जिम्मेदारी होती है, जिनमें बच्चे को संरक्षण, पुनर्वास और आवश्यक सहायता की जरूरत होती है. नए जिलों में समितियों के गठन से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था उपलब्ध होगी.

किशोर न्याय व्यवस्था को मिलेगी संस्थागत मजबूती
निवाड़ी, मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा के लिए किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियों का गठन राज्य में बाल संरक्षण तंत्र के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण है. नए जिलों के गठन के बाद वहां प्रशासनिक और न्यायिक संस्थाओं की आवश्यक संरचना विकसित की जा रही है. इसी क्रम में किशोर न्याय से जुड़ी संस्थाओं का गठन किया गया है.

इन संस्थाओं के माध्यम से बच्चों से जुड़े मामलों को किशोर न्याय कानून के अनुरूप स्थानीय स्तर पर देखा जा सकेगा. इससे संबंधित मामलों के लिए दूसरे जिलों पर निर्भरता कम होने की संभावना है और बच्चों से जुड़े मामलों के निराकरण तथा संरक्षण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है.

तीन महिला न्यायिक अधिकारियों की केंद्रीय संस्थानों में प्रतिनियुक्ति
राज्य शासन ने मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा की तीन महिला अधिकारियों की सेवाएं केंद्रीय संस्थानों को भी प्रतिनियुक्ति पर सौंपी हैं. हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद इन अधिकारियों की सेवाएं राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी), नई दिल्ली और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), नई दिल्ली के लिए दो वर्ष की अवधि के लिए सौंपी गई हैं.

इनमें भोपाल में 17वें व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खंड के पद पर पदस्थ भाविनी सिंह को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में सहायक रजिस्ट्रार के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया है. उनकी सेवाएं एनएचआरसी, नई दिल्ली को सौंपी गई हैं.

दृष्टि बी शाह की एनसीएलटी में प्रतिनियुक्ति
ग्वालियर जिले के डबरा में प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, वरिष्ठ खंड के पद पर पदस्थ दृष्टि बी शाह की सेवाएं उप पंजीयक के रूप में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण की नई दिल्ली खंडपीठ को सौंपी गई हैं.

एनसीएलटी में उनकी प्रतिनियुक्ति के जरिए उन्हें केंद्रीय स्तर के न्यायिक संस्थान में काम करने का अवसर मिलेगा. एनसीएलटी कंपनी कानून से जुड़े मामलों के निराकरण के लिए गठित महत्वपूर्ण न्यायिक निकाय है.

अनुप्रिया पाराशर त्रिपाठी भी एनसीएलटी भेजी गईं
अनुप्रिया पाराशर त्रिपाठी की नवीन पदस्थापना उप पंजीयक, राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण, नई दिल्ली खंडपीठ में की गई है. राज्य शासन की अधिसूचना के अनुसार उनकी सेवाएं भी केंद्रीय संस्थान को सौंपी गई हैं.

इस तरह मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा की तीन महिला अधिकारियों को अलग-अलग दायित्वों के साथ केंद्रीय संस्थानों में प्रतिनियुक्त किया गया है. इन नियुक्तियों में एक अधिकारी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और दो अधिकारियों को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण में जिम्मेदारी दी गई है.

दो वर्ष या आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी प्रतिनियुक्ति
राज्य शासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार तीनों न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष अथवा आगामी आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावशील रहेगी.

एक ओर सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल को राज्य स्तरीय किशोर न्याय चयन समिति की कमान सौंपी गई है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक सेवा की तीन महिला अधिकारियों को केंद्रीय संस्थानों में प्रतिनियुक्ति दी गई है. इसके साथ ही चार नए जिलों में किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियों का गठन किया गया है. शासन के इन फैसलों से प्रदेश की किशोर न्याय और बाल संरक्षण व्यवस्था के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों की केंद्रीय संस्थानों में भागीदारी को भी विस्तार मिला है.

संवाददाता :- विवेक कुमार द्विवेदी

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