जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। ग्राम पंचायत नागई-2 के मुड़वानी गांव में मगहर टोला से बैगान बस्ती को जोड़ने वाली PMGSY सड़क तेज बारिश के पानी में बह गई। सड़क के बीचों-बीच बड़ा हिस्सा कट जाने से ग्रामीणों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक इस सड़क का निर्माण वर्ष 2026 में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के बाद ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन पहली ही बरसात में सड़क की स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क बही, रास्ता बंद और जिम्मेदार बेखबर!
तेज बारिश के बाद सड़क का बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गया। तस्वीरों में सड़क के नीचे की मिट्टी पूरी तरह कट चुकी है और कई स्थानों पर सड़क टूटकर पानी में समा गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से आसपास के कई गांवों के लोग रोजाना आवागमन करते हैं। सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ रहा है।
6 पुलियों का प्रस्ताव, फिर भी क्यों बह गई सड़क?
बताया गया कि पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए मार्ग पर छह पुलियों का निर्माण किया जाना था। इसके बावजूद सड़क का इस तरह बह जाना निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्माण के दौरान नाले और पानी के प्राकृतिक बहाव का सही आकलन किया जाता, तो यह स्थिति पैदा नहीं होती।

जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, तकनीकी मानकों और जल निकासी व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। सवाल यह भी है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़क यदि पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में मौके का निरीक्षण कर सिर्फ कागजी खानापूर्ति करता है या सड़क निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी करता है।

संवाददाता :- विवेक कुमार द्विवेदी
