RTI का जवाब एक साल में नहीं, 14 तालाबों पर सवाल

सुकहर पंचायत में करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप, कागजों में तालाब निर्माण पूरा दिखाने का दावा, अपात्रों को जन-मन बैगा आवास और पीएम आवास की राशि से जेसीबी खरीदने के आरोप

सिंगरौली चितरंगी जनपद पंचायत का ग्राम पंचायत सुकहर में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पंचायत में करोड़ों रुपये के कार्यों में अनियमितता की गई और कई निर्माण कार्यों को कागजों में पूरा दर्शाकर राशि निकाल ली गई। मामले में जानकारी जुटाने के लिए लगाई गई RTI का भी एक साल बीतने के बाद जवाब नहीं मिलने से पंचायत के कामकाज पर सवाल खड़े हो रहे हैं।14 तालाबों का निर्माण या सिर्फ कागजी खानापूर्ति?

शिकायतकर्ताओं के अनुसार पंचायत में 14 तालाबों के निर्माण के नाम पर सरकारी राशि खर्च की गई, लेकिन इनमें से कई कार्यों की वास्तविकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्यों को दस्तावेजों में पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर कार्य की स्थिति अलग है। अब सवाल यह है? कि इन तालाबों का मौका सत्यापन, तकनीकी मूल्यांकन और जियो-टैगिंग किस आधार पर की गई? यदि जांच में कागज और जमीन की हकीकत में अंतर सामने आता है तो सरकारी राशि के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आ सकता है।

बैगा आवास में पात्रता दरकिनार करने का आरोप-

जन-मन बैगा आवास योजना में भी गंभीर आरोप है कि पात्र हितग्राहियों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को आवास का लाभ दिया गया। इससे योजना के चयन और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने लाभार्थियों की पात्रता, स्वीकृति आदेश और खाते में हुए भुगतान की जांच की मांग की है।

PM आवास की राशि से जेसीबी खरीदने का आरोप- पंचायत से जुड़ा सबसे गंभीर आरोप प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि के कथित दुरुपयोग का है। आरोप लगाया गया है कि आवास निर्माण के लिए जारी राशि का इस्तेमाल जेसीबी मशीन खरीदने में किया गया। यह आरोप कितना सही है, इसका खुलासा हितग्राहियों के बैंक खातों, भुगतान विवरण और आवास निर्माण की भौतिक स्थिति की जांच से ही हो सकता है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है।

एक साल से RTI लंबित, जानकारी न देने पर सवाल- मामले में RTI के जरिए पंचायत के कार्यों और भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। आरोप है कि एक साल गुजरने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। यही स्थिति अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है—आखिर पंचायत से जुड़ी वह कौन-सी जानकारी है, जिसे आवेदक को लंबे समय बाद भी नहीं दिया गया? RTI में मांगे गए दस्तावेज यदि सामने आते हैं तो तालाब निर्माण, आवास योजना और भुगतान से जुड़े आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।

जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल- सुकहर पंचायत में लगाए गए आरोपों के बाद अब जनपद और जिला पंचायत प्रशासन की भूमिका पर भी नजर है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि पंचायत के पिछले वर्षों के सभी निर्माण कार्यों और

योजनाओं का रिकॉर्ड खंगाला जाए
विशेष रूप से 14 तालाबों की स्थल जांच, मस्टर रोल, भुगतान वाउचर, तकनीकी स्वीकृति, जियो-टैगिंग, जन-मन आवास के हितग्राही चयन और PM आवास की राशि के उपयोग की जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों से राशि की वसूली के साथ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

अब सवाल यही है—क्या जिम्मेदार अधिकारी सुकहर पंचायत के इन आरोपों पर संज्ञान लेकर जांच कराएंगे, या फिर RTI की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा रह जाएगा?

संवाददाता :- आशीष सोनी

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