मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल शहडोल जिले स्थित शासकीय महाविद्यालय केशवाही से उच्च शिक्षा विभाग और छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली में धांधली का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। कॉलेज में कक्षाएं सूनी पड़ी हैं और फिजिकल उपस्थिति रजिस्टरों के पन्ने कोरे हैं, लेकिन सरकारी छात्रवृत्ति पोर्टल पर विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कॉलेज के ही एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने कैमरे के सामने आकर तंत्र की कड़वी सच्चाई बयां कर दी।
फिजिकल रजिस्टर खाली, पोर्टल पर उपस्थिति फुल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केशवाही कॉलेज में दर्जनों छात्र-छात्राएं महीनों से अनुपस्थित चल रहे हैं। भौतिक उपस्थिति रजिस्टर में उनकी गैरमौजूदगी साफ देखी जा सकती है। इसके बावजूद छात्रवृत्ति की पात्रता बनाए रखने के लिए डिजिटल पोर्टल पर फर्जी तरीके से उनकी उपस्थिति ‘ग्रीन’ (उपस्थित) मार्क की जा रही है। नियमों के मुताबिक छात्रवृत्ति की राशि जारी करने के लिए न्यूनतम उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इसी का फायदा उठाने के लिए यह पूरा खेल रचा गया है।
असिस्टेंट प्रोफेसर के कबूलनामे से हड़कंप
मामले ने तब तूल पकड़ा जब संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर ने ऑन-कैमरा स्वीकार किया कि कॉलेज प्रशासन और सिस्टम के दबाव में फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। प्रोफेसर के इस सनसनीखेज कबूलनामे के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन में खलबली मच गई है।
उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग
मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कॉलेज के भौतिक उपस्थिति रजिस्टर, बायोमेट्रिक/ऑनलाइन पोर्टल और जारी की गई छात्रवृत्ति के रिकॉर्ड का गहनता से मिलान (Cross-Verification) कराया जाए, तो एक बड़े अंतरराज्यीय या विभागीय घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के आदेश पर टिकी हैं।

