रसोई घर गायब, गैस खत्म: धुएं के आगोश में बाहर खाना बनाने को मजबूर सहायिका

मध्यप्रदेश सिंगरौली जिले के चितरंगी विकासखंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय देवगांव में बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। विद्यालय में किचन शेड (रसोई घर) न होने के कारण इस कड़कड़ाती बरसात के मौसम में भी स्कूली बच्चों का मध्याह्न भोजन खुले आसमान के नीचे एक महुआ के पेड़ के नीचे बनाया जा रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि शासन से रसोई गैस की व्यवस्था होने के बावजूद समूह संचालक आज भी लकड़ी के पारंपरिक चूल्हे का उपयोग कर रहे हैं।

धुएं के कारण कमरों में नो-एंट्री, सहायिकाएं मजबूर:-
बारिश के दिनों में जब बाहर खाना बनाना असंभव हो जाता है, तब भी सहायिकाओं को भीगते हुए पेड़ के नीचे ही चूल्हा जलाना पड़ता है। स्कूल के शिक्षकों का साफ कहना है कि वे स्कूल के कमरों के भीतर खाना नहीं बनाने देंगे, क्योंकि चूल्हे के धुएं से क्लासरूम काले हो जाते हैं और बच्चों को पढ़ने में दिक्कत होती है।
इस आपसी खींचतान में सबसे ज्यादा मुसीबत रसोई सहायिकाओं की है, जो इस मौसम में भी बाहर खाना बनाने को मजबूर हैं।

मेन्यू में भेदभाव: आंगनवाड़ी को पूड़ी, स्कूली बच्चों को सिर्फ दाल-चावल:-
इस अव्यवस्था के बीच भोजन के मेन्यू में भी भारी भेदभाव देखने को मिल रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इसी परिसर में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र के बच्चों के लिए तो तेल में तली हुई पूड़ी बनाई जाती है, लेकिन स्कूल के प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग के बच्चों को सिर्फ रूखा-सूखा चावल, दाल और सब्जी परोसी जा रही है।
भोजन की गुणवत्ता और मेन्यू को लेकर भी बच्चों में असंतोष है।

गैस सिलेंडर पर धूल, कटी जा रही हैं लकड़ियां:-
शासन द्वारा हर मध्याह्न भोजन समूह को गैस कनेक्शन और सिलेंडर मुहैया कराए गए हैं ताकि पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।
इसके बावजूद देवगांव के समूह संचालक गैस नहीं भरा रहे हैं।
महंगे कमर्शियल रिफिल के डर या लापरवाही के चलते आज भी गीली लकड़ियों से चूल्हा सुलगाया जा रहा है, जिससे निकलने वाला भारी धुआं स्कूल परिसर में फैलता है।
इस पूरे मामले में अब देखना यह होगा कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और महिला एवं बाल विकास विभाग के आला अधिकारी इस लापरवाही पर क्या संज्ञान लेते हैं और बच्चों को कब तक पक्का किचन शेड नसीब होता है।

ब्यूरो चीफ :-आशीष सोनी

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