सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
नवागत जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के पदभार ग्रहण करते ही स्कूलों की जमीनी हकीकत बद से बदतर हो गई है। इसका सबसे संवेदनशील उदाहरण क्षेत्र के एक शासकीय स्कूल में देखने को मिला है, जहाँ बच्चे बीते तीन महीनों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन भी साबित हुई बेअसर-
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल परिसर में लगा हैंडपंप पिछले तीन महीने से खराब पड़ा है। स्कूल प्रबंधन और ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत ‘सीएम हेल्पलाइन’ (CM Helpline) पर भी दर्ज कराई गई थी।
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूटी और समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका है।
निर्माण कार्य के टैंकर का दूषित पानी पीने को मजबूर बच्चे-
हैंडपंप खराब होने के कारण स्कूल के मासूम बच्चे गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं। वर्तमान में स्कूल में बाउंड्री वॉल (सीमा सुरक्षा दीवार) का निर्माण कार्य चल रहा है।
इस निर्माण कार्य के लिए टैंकरों के माध्यम से जो पानी मंगाया जा रहा है, वह पीने योग्य नहीं है।
लेकिन प्यास से व्याकुल बच्चे इसी टैंकर के दूषित और अस्वच्छ पानी को पीने के लिए मजबूर हैं, जिससे उनके बीमार होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल?
नवागत जिला शिक्षा अधिकारी के आते ही क्षेत्र की शैक्षणिक और बुनियादी व्यवस्थाओं का इस कदर लचर होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
एक तरफ सरकार ‘स्वच्छ जल’ और ‘बेहतर शिक्षा’ के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ चितरंगी के इस स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हैंडपंप को सुधारा जाए और बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

ब्यूरो चीफ : आशीष सोनी
