सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के दावे करने वाली सरकार के राज में प्राथमिक शाला गोड़हा में भर्ती का पूरा खेल ही उल्टा चल रहा है। यहां नियम-कायदे ताक पर रखकर अवैध शिक्षक भर्ती कर दी गई। जब ग्रामीणों ने सबूतों के साथ शिकायत की तो जिला शिक्षा विभाग ने जांच करना तो दूर, मामले को दबाने की “लीपापोती” शुरू कर दी।
भर्ती नहीं, जुगाड़ हुआ
शिकायतकर्ताओं के अनुसार स्कूल में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति बिना सूचना, बिना मेरिट, बिना प्रक्रिया के की गई। योग्य और पात्र अभ्यर्थियों को लाइन में खड़ा रखा गया और सिफारिश वाले व्यक्ति को चुपचाप जॉइनिंग दे दी गई। न नोटिस बोर्ड पर सूचना चिपकी, न ऑनलाइन सूची आई।
शिकायत = रद्दी की टोकरी
जब ग्रामीण दस्तावेज और गवाहों के साथ BEO कार्यालय पहुंचे तो उन्हें सिर्फ “जांच कराएंगे” का आश्वासन मिला। उसके बाद से आज तक न कोई अधिकारी आया, न कोई पत्र निकला। उधर स्कूल में आनन-फानन में रजिस्टर बदले जा रहे हैं। पुरानी एंट्री फाड़ी जा रही हैं ताकि सबूत ही मिट जाएं।
एक ग्रामीण का कहना है:
“साहब शिकायत सुनते ही आरोपियों को फोन कर देते हैं। अब वही लोग सबूत मिटाने में लगे हैं। गरीब का बच्चा पढ़े या न पढ़े, इनको फर्क नहीं पड़ता।”
सवाल शिक्षा विभाग पर
- भर्ती की प्रक्रिया कहां हुई? सूची कहां है?
- शिकायत के 1 हफ्ते बाद भी जांच क्यों नहीं?
- क्या अधिकारियों को संरक्षण प्राप्त है?
शिक्षा विभाग की इस चुप्पी से साफ है कि या तो मिलीभगत है या लापरवाही। दोनों ही स्थिति में बच्चों का भविष्य दांव पर है।

मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर महोदय और जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि:
नोट: इस मामले में शिक्षा विभाग की साख दांव पर है। अब देखना है प्रशासन कब नींद से जागता है।

वर्ल्ड इनफॉरमेशन न्यूज़ से संवाददाता विवेक कुमार द्विवेदी की खास रिपोर्ट
