सिंगरौली नगर निगम के बलियरी रोड की बदहाली पर उठे सवाल, बरसात में सड़क नहीं, गड्ढों का समंदर बना रास्ता — आखिर करोड़ों रुपये गए कहां?
सिंगरौली। नगर निगम सिंगरौली की विकास योजनाओं के दावों की पोल रामलीला मैदान के पीछे स्थित बलियरी रोड खोल रही है। वर्षों से बदहाल यह सड़क हर बरसात में तालाब में तब्दील हो जाती है। सड़क पर बने विशाल गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और वाहन चालकों को रोज जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।
विडंबना यह है कि नगर निगम विकास के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत तस्वीरों में साफ दिखाई दे रही है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और जलभराव इस बात की गवाही दे रहे हैं कि विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
हाल के दिनों में राष्ट्रीय मीडिया में नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान के मुंडन को लेकर खूब चर्चा हुई। उन्हें मानवता और संवेदनशीलता का प्रतीक बताकर खबरें प्रसारित की गईं। लेकिन सवाल यह है कि यदि नगर निगम क्षेत्र की सड़कें, नालियां और बुनियादी सुविधाएं इतनी बदहाल हैं, तो क्या केवल प्रतीकात्मक कार्यों से जनता की समस्याओं का समाधान हो जाएगा?
यदि यही बदहाल सड़क किसी अधिकारी या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के घर के सामने होती, तो शायद इसकी मरम्मत रातों-रात हो जाती। लेकिन आम नागरिक वर्षों से इसी बदहाली में जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन सड़कों की स्थिति पहले से भी बदतर हो गई। दूसरी ओर कई ठेकेदार महीनों से भुगतान न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भुगतान नहीं हुआ और सड़कें भी नहीं बनीं, तो विकास का पैसा आखिर गया कहां?
तस्वीरें साफ बता रही हैं कि यह समस्या एक-दो दिन की नहीं बल्कि वर्षों की लापरवाही का परिणाम है। हर बरसात में यही हाल होता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में विकास दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस खबर के बाद नगर निगम प्रशासन और आयुक्त सविता प्रधान की नींद खुलेगी, या फिर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर केवल चर्चाओं और प्रतीकात्मक आयोजनों तक ही प्रशासन सीमित रहेगा?

ब्यूरो चीफ :-आशीष सोनी
