प्रदेश भर में राजस्व संबंधी कामकाज ठप पड़ा है। वजह है पटवारियों का गुस्सा। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर पटवारी संघ ने आज अनशन शुरू कर दिया है। अनशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
वीडियो में क्या है?
वायरल वीडियो में पटवारी साहब काली पट्टी बांधकर, हाथ में तख्तियां लेकर “हमारी मांगें पूरी करो” के नारे लगा रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगें नहीं मानेगी, तब तक तहसील में एक भी फाइल नहीं हिलेगी।
पटवारियों का आरोप है कि सरकार उनसे 24×7 काम तो लेती है, लेकिन मानदेय, पदोन्नति और बीमा जैसी मूलभूत सुविधाएं देने में आनाकानी कर रही है। ऊपर से जनता और अधिकारियों का दबाव अलग।
पटवारियों की मुख्य मांगें:
- ग्रेड-पे में बढ़ोतरी और समय पर पदोन्नति
- बीमा और पेंशन की गारंटी
- ऑनलाइन पोर्टल की समस्याएं दूर करना
- पटवारियों पर हो रहे राजनीतिक दबाव को बंद करना
जनता हलाकान, काम रुके
पटवारियों के अनशन से नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और ऋण पुस्तिका जैसे जरूरी काम ठप हो गए हैं। किसान से लेकर आम आदमी तक तहसील के चक्कर काटकर लौट रहा है।
अनशन कर रहे एक पटवारी ने वीडियो में कहा:
“हम शासन की रीढ़ हैं। अगर रीढ़ ही टूट जाएगी तो सरकार कैसे चलेगी? अब आर-पार की लड़ाई है।”
प्रशासन की नींद उड़ी
वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर कार्यालय में आपात बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक सरकार बैकडोर से बातचीत की कोशिश कर रही है, लेकिन पटवारी संघ झुकने को तैयार नहीं है।

चेतावनी
पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे में मांगें नहीं मानी गईं तो अनशन को उग्र आंदोलन में बदला जाएगा और सभी पटवारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे।
कुल मिलाकर: सरकार के लिए ये अनशन गले की हड्डी बन गया है। अब देखना है कि “सुशासन” का दावा करने वाली सरकार पटवारियों को कब मनाती है।
वर्ल्ड इनफॉरमेशन न्यूज़ से संवाददाता विवेक कुमार द्विवेदी की खास रिपोर्ट

