सुसाइड नोट में तबादले को लेकर छलका दर्दव्यवस्था पर गंभीर आरोप, प्रधान आरक्षक की मौत के बाद पीएचक्यू की कार्यप्रणाली पर सवाल


सिंगरौली । पुलिस विभाग के स्पेशल ब्रांच में पदस्थ में कार्यरत प्रधान आरक्षक राकेश गांगले की आत्महत्या ने पुलिस मुख्यालय भोपाल की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सुसाइड नोट में तबादले को लेकर लिखी गई बातों ने महकमे के भीतर की उस पीड़ा को उजागर किया है, जिसे शायद ड्यूटी के दबाव में लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था। यदि सुसाइड नोट में दर्ज आरोपों को आधार माना जाए तो राकेश अपने स्थानांतरण के लिए कई बार भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय पहुंचा, आवेदन दिए, लेकिन उसकी गुहार पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई।
कार्यवाहक प्रधान आरक्षक राकेश गांगले पुलिस विशेष शाखा में पदस्थ था और मूलत: खरगौन जिले का निवासी था। खरगौन और सिंगरौली के बीच 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी है। बताया गया है कि वह खरगौन अथवा आसपास के जिले में स्थानांतरण चाहता था। रविवार की रात करीब एक बजे उसने कार्यालय के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार को उसका शव सिंगरौली से खरगोन के लिए रवाना किया गया।

क्या पुलिस मुख्यालय में आम कर्मचारियों की सुनवाई नहीं ?
सुसाइड नोट में कथित तौर पर यह भी लिखा गया कि पुलिस मुख्यालय में उसके जैसे साधारण कर्मचारियों की पूछ-परख नहीं है। यही बात अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है, क्या पुलिस मुख्यालय की व्यवस्था केवल प्रभावशाली लोगों की सुनती है, यदि एक कर्मचारी अपनी समस्या लेकर बार-बार मुख्यालय के चक्कर काटता रहा और उसकी पीड़ा समय रहते नहीं सुनी गई, तो यह सिर्फ एक कर्मचारी की त्रासदी नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न है। राकेश की मौत ने यह बहस भी छेड़ दी है कि तबादले जैसे प्रशासनिक मामलों में कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों और पारिवारिक जरूरतों को कितनी गंभीरता से सुना जाता है। पुलिस विभाग से अपेक्षा अनुशासन के साथ संवेदनशीलता की भी होती है। अब जरूरत है कि सुसाइड नोट में उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर उसकी शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई थी।

राखी पर घर आऊंगा, बेटे से आखिरी बातचीत में छलका दर्द
हेड कांस्टेबल राकेश गागेले ने फांसी के फंदे पर झूल रविवार एवं सोमवार की रात दफ्तर में ही आत्महत्या कर लिया था। मौके से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने ट्रांसफर नहीं होने का जिक्र किया है। घटना के एक दिन पहले शनिवार को बेटे अक्षय से बातचीत में उन्होंने कहा था कि राखी पर घर आऊंगा, जल्द ट्रांसफर हो जाएगा। परिजनों के मुताबिक, घर से करीब 1000 किलोमीटर दूर ड्यूटी होने का दर्द उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। आज जिला चिकित्सालय बैढ़न में शव के पोस्टमार्टम के बाद खरगौन परिजन रोते-बिलखते हुये पुरानी बातों को ताजा करते हुये रवाना हुये। इसके पूर्व सिंगरौली पुलिस सेवको ने उन्हें नम ऑखों से श्रद्धांजली दी। वहीं उक्त घटना की जांच पुलिस कर रही है और राकेश गांगले की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है।

ब्यूरो चीफ :- आशीष सोनी

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