देवरीडांड़ में हाईस्कूल के नए भवन का मामला, निर्माण पूरा होने से पहले ही दीवारों में क्रैक; सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता, जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
सिंगरौली। मोरवा वार्ड क्रमांक-1 के पेड़ताली क्षेत्र में कन्या महाविद्यालय के आगे स्थित शासकीय हाईस्कूल देवरीडांड़ के लिए बनाए जा रहे नए भवन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा भवन लगभग बनकर तैयार है। दीवारों पर प्लास्टर और पेंट का काम पूरा हो चुका है, जबकि फर्श पर टाइल्स भी लगाई जा चुकी हैं। लेकिन भवन के हैंडओवर से पहले ही कई हिस्सों में दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। कुछ स्थानों पर प्लास्टर भी टूटकर गिरने की स्थिति में है।
हैंडओवर से पहले ही दिखने लगीं दरारें
भवन की मौजूदा स्थिति को देखकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जिस भवन में आने वाले समय में सैकड़ों छात्र-छात्राएं अध्ययन करेंगे, उसमें उपयोग शुरू होने से पहले ही इस तरह की दरारें सामने आना चिंता का विषय है। सवाल यह है कि यदि भवन अभी से क्षतिग्रस्त होने लगा है तो भविष्य में विद्यार्थियों की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित होगी?
ब्लास्टिंग का हवाला कितना सही
इलाके में होने वाली ब्लास्टिंग को संभावित कारण बताया जा सकता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण स्थल ब्लास्टिंग क्षेत्र से करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर है, तो नए भवन में इतनी बड़ी दरारें और प्लास्टर टूटने की स्थिति कैसे बनी? आसपास की पुरानी इमारतों में यदि इसी स्तर की क्षति नजर नहीं आती, तो नए भवन की निर्माण गुणवत्ता की जांच किया जाना जरूरी हो जाता है।
निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भवन के हैंडओवर से पहले ही यदि दीवारों में गंभीर दरारें दिखाई दे रही थीं, तो संबंधित निर्माण एजेंसी और गुणवत्ता जांच से जुड़े अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? क्या निर्माण के दौरान सामग्री और निर्माण कार्य की नियमित जांच की गई? क्या भवन की तकनीकी गुणवत्ता की जांच किसी सक्षम एजेंसी से कराई गई?
विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला
यह केवल सरकारी भवन की गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऐसे में भवन को बिना तकनीकी जांच और गुणवत्ता परीक्षण के हैंडओवर किया जाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। जरूरत इस बात की है कि भवन की विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कराई जाए और दरारों के वास्तविक कारण का पता लगाया जाए।
कलेक्टर के निर्देशों के बीच सवाल
सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल द्वारा सरकारी भवनों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर जोर दिए जाने के बावजूद देवरीडांड़ के इस भवन की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या गुणवत्ता की कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या प्रशासन भवन की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएगा, दोष मिलने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेगा और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, या फिर दरारों के बावजूद भवन को हैंडओवर कर दिया जाएगा?

