नई दिल्ली:राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर और धांधली के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए संबंधित अभ्यर्थियों को राहत के लिए संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) का रुख करने का निर्देश दिया है।
अदालत की टिप्पणी और निर्देश मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत शिकायतों और दस्तावेजों की जांच के लिए अभ्यर्थियों को पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के पास ऐसे स्थानीय और तथ्यात्मक मामलों की पड़ताल करने का पर्याप्त अधिकार क्षेत्र है।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ताओं (छात्रों) का आरोप था कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी की गई OMR शीट और उनके द्वारा परीक्षा में दिए गए जवाबों में विसंगतियां हैं। छात्रों का दावा था कि उनके वास्तविक अंकों और OMR शीट के रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई है, जिसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
छात्रों के पास अब क्या विकल्प?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रभावित छात्र अपनी-अपनी याचिकाओं के साथ संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों में अपील दाखिल कर सकेंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से हाईकोर्ट्स को इन मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर त्वरित सुनवाई करने का अवसर मिलेगा।

संवाददाता :- विवेक द्विवेदी
